उत्तराखंड की खीर गंगा नदी में अनोखी घटना: उल्टी दिशा में बाढ़, विशेषज्ञ हैरान..

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धराली, उत्तराखंड में खीर गंगा नदी में उल्टी दिशा में बाढ़: तबाही का कारण और प्रभाव

 

उत्तरकाशी, 7 अगस्त 2025: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार, 5 अगस्त 2025 को खीर गंगा नदी (जिसे खीर गाड़ भी कहा जाता है) में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल गांव का नक्शा बदल दिया, बल्कि एक असामान्य घटना ने सभी का ध्यान खींचा—नदी का जल प्रवाह सामान्य दिशा के विपरीत होने की खबरें सामने आईं। इस लेख में हम इस आपदा के कारणों, प्रभावों और वैज्ञानिक विश्लेषण को समझेंगे।

खीर गंगा नदी में उल्टी दिशा में जल प्रवाह: क्या है सच्चाई?

स्थानीय लोगों और कुछ वायरल वीडियो के अनुसार, खीर गंगा नदी में जल का प्रवाह सामान्य दिशा के विपरीत होने की बात सामने आई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना भू-कटाव (River Morphology) और नदी की संरचना से संबंधित हो सकती है। नदी के कॉनवेक्स साइड (बाहरी घुमाव) पर पानी का तेज बहाव और भू-कटाव ने मलबे को एक विशेष दिशा में धकेला, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ कि नदी का प्रवाह उल्टी दिशा में है। हालांकि, यह कोई स्थायी परिवर्तन नहीं है, बल्कि अस्थायी भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों का परिणाम हो सकता है।

बाढ़ का कारण: बादल फटना या कुछ और?

हालांकि शुरुआती खबरों में बादल फटने को बाढ़ का कारण बताया गया, लेकिन मौसम विभाग ने बादल फटने की घटना से इंकार किया है। विशेषज्ञों और स्थानीय पत्रकार शैलेंद्र गोदियाल के अनुसार, पिछले दो दिनों से क्षेत्र में लगातार भारी बारिश हो रही थी, जिसने खीर गंगा सहित अन्य नदियों और गदेरों को उफान पर ला दिया।

वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमनद झीलों (Glacial Lakes) में जलस्तर बढ़ने से ऐसी आपदाएं हो रही हैं। डीडी चुनियाल, दून यूनिवर्सिटी के भूविज्ञानी, के अनुसार, धराली के ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में खीर गंगा के कैचमेंट एरिया में ग्लेशियर तालाबों का टूटना इस बाढ़ का प्रमुख कारण हो सकता है। इन तालाबों में अचानक बढ़ा जलस्तर और भारी बारिश ने मलबे के साथ मिलकर प्रलयकारी बाढ़ को जन्म दिया।

तबाही का मंजर: धराली गांव में हाहाकार

5 अगस्त 2025 को दोपहर करीब 1:30 बजे खीर गंगा नदी में अचानक उफान आया। 1230 फीट की ऊंचाई से तेज गति (लगभग 43 किमी/घंटा) के साथ आए मलबे और पानी ने महज 30-34 सेकंड में धराली गांव को जलमग्न कर दिया। इस आपदा ने:

20-25 होटल और होमस्टे को पूरी तरह नष्ट कर दिया।

10-12 लोगों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है, जबकि चार लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है।

गंगोत्री नेशनल हाईवे के कई हिस्से, पुल और सड़कें बह गईं, जिससे धराली का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया।

गांव के बाजार, घर, और खेत मलबे के ढेर में तब्दील हो गए।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, खीर गंगा नदी का नाम इसकी प्रकृति के कारण पड़ा है, क्योंकि यह हमेशा भारी मलबे के साथ उफान पर आती है, जो गाढ़ी खीर जैसा दिखता है। यह नदी हर 2-3 साल में उफान पर आती है, जैसा कि 2018 और 2021 में भी देखा गया।

राहत और बचाव कार्य: प्रशासन और सेना सक्रिय

आपदा की खबर मिलते ही सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, और स्थानीय पुलिस ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। हालांकि, गंगोत्री नेशनल हाईवे के टूटने और गंगनानी के पास बीआरओ के कंक्रीट पुल के बह जाने से बचाव कार्यों में बाधा आई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हर्षिल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और प्रभावितों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

वैज्ञानिक और पर्यावरणीय चेतावनी

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय गलतियां, जैसे अनियंत्रित निर्माण और ग्लेशियर क्षेत्रों में हस्तक्षेप, ऐसी आपदाओं को बढ़ा रहे हैं। प्रोफेसर वाईपी सुंदरियाल के अनुसार, धराली की आपदा 2021 की चमोली त्रासदी से मिलती-जुलती है। हिमनद झीलों की निगरानी और उचित भूमि-उपयोग नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

निष्कर्ष

धराली में खीर गंगा नदी की बाढ़ ने एक बार फिर उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों की भौगोलिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को उजागर किया है। उल्टी दिशा में जल प्रवाह की घटना भले ही अस्थायी और भू-कटाव से संबंधित हो, लेकिन यह आपदा जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियर झीलों के खतरों की ओर इशारा करती है। प्रशासन और वैज्ञानिकों को मिलकर ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए दीर्घकालिक उपाय करने होंगे, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी से बचा जा सके।

The India News 24
Author: The India News 24

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